20 Mar 2026, Fri
Breaking

न्यूज स्कूप : पिछले कुछ महीनों से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में जारी गिरावट ने निवेशकों और आम जनता के बीच चिंता पैदा कर दी है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नवनियुक्त गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि रुपये की इस चाल का भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनके अनुसार, यह उतार-चढ़ाव ऐतिहासिक ट्रेंड्स के अनुरूप ही है।

एक हालिया इंटरव्यू में गवर्नर मल्होत्रा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि करेंसी में लचीलापन होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति पहले के मुकाबले कहीं अधिक सुदृढ़ है।

ऐतिहासिक गिरावट के दायरे में है रुपया

RBI गवर्नर ने समझाया कि यदि हम लंबी अवधि के आंकड़े देखें, तो मौजूदा गिरावट असामान्य नहीं है:

  • 10 वर्षों का औसत: पिछले एक दशक में रुपया औसतन हर साल करीब 3% कमजोर हुआ है।
  • 20 वर्षों का औसत: पिछले दो दशकों में यह सालाना गिरावट लगभग 3.4% रही है। संजय मल्होत्रा का मानना है कि वर्तमान में रुपये की स्थिति बीते 10-20 वर्षों के इसी औसत ट्रेंड के भीतर है, इसलिए इसे ‘असाधारण’ कहना गलत होगा।

रुपये पर दबाव के मुख्य कारण

साल 2025 में रुपये के एशियाई मुद्राओं में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने के पीछे कई वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं:

  1. मजबूत डॉलर: अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती के कारण वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स बढ़ रहा है।
  2. FII की निकासी: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से भारी मात्रा में पैसा निकाला है।
  3. व्यापार शुल्क अनिश्चितता: भारत और अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड टैरिफ (Trade Tariff) समझौतों को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी रुपये को प्रभावित किया है।

RBI की रणनीति और विदेशी मुद्रा भंडार का ‘सुरक्षा कवच’

गवर्नर मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि RBI अब बाजार की ताकतों को अधिक जगह दे रहा है। बैंक का उद्देश्य रुपये की कोई ‘फिक्स्ड वैल्यू’ तय करना नहीं है, बल्कि बाजार में होने वाले अत्यधिक उतार-चढ़ाव या सट्टेबाजी को रोकना है।

भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति पर भरोसा जताने के पीछे ठोस कारण हैं:

  • आयात कवर: देश के पास फिलहाल करीब 11 महीनों के आयात के बराबर विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है।
  • कर्ज कवरेज: भारत के कुल बाहरी कर्ज का लगभग 92% हिस्सा विदेशी मुद्रा भंडार द्वारा कवर किया जा सकता है।
  • मजबूत फॉरेक्स: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग $690 अरब के स्तर पर है, जबकि कुल बाहरी कर्ज $750 अरब है। यह अंतर इतना कम है कि भारत अपनी अंतरराष्ट्रीय देनदारियों को बिना किसी परेशानी के निभा सकता है।

व्यापार घाटे में कमी से मिली राहत

नवंबर के आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था के पक्ष में आए हैं। सोना, कोयला और तेल के आयात में कमी आने से व्यापार घाटा 5 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसके साथ ही अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट (निर्यात) में भी बढ़त दर्ज की गई है, जो रुपये को स्थिरता देने में मददगार साबित होगी।

By News Scoop Desk

News Scoop is a digital news platform that focuses on delivering exclusive, fast, verified and impactful stories to readers. Unlike traditional news portals that rely heavily on routine reports, a news scoop platform prioritizes breaking news, inside information, investigative leads, political developments, public interest stories and viral happenings fresh and first.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *