न्यूज स्कूप : भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ ऐसी कहानियां होती हैं जो परदे पर दिखने वाली फिल्मों से भी ज्यादा रोमांचक और प्रेरणादायक होती हैं। ऐसी ही एक कहानी है ऋषभ शेट्टी (Rishab Shetty) की। तटीय कर्नाटक के कुंडापुरा के एक छोटे से गांव केराडी से शुरू हुआ उनका सफर आज उन्हें भारतीय सिनेमा की सबसे शक्तिशाली रचनात्मक ताकतों में से एक बना चुका है।
प्रशांत शेट्टी के रूप में जन्मे ऋषभ का सुपरस्टार बनने का रास्ता फूलों की सेज नहीं था, बल्कि यह बरसों की मेहनत, छोटे-मोटे काम और सिनेमा के प्रति अटूट समर्पण का परिणाम है।
ऋषभ के सपनों की उड़ान उन्हें बेंगलुरु ले आई। शुरुआती दिनों में उन्होंने अपना गुजारा करने के लिए कई छोटे-मोटे काम किए, लेकिन उनका असली दिल थिएटर और पारंपरिक कला यक्षगान में बसता था।
- पर्दे के पीछे का अनुभव: सिनेमा में कदम रखने के बाद उन्होंने सीधे बड़े रोल नहीं मांगे। उन्होंने तुगलक (2012), लूसिया (2013), और उलिदावरु कंडंते (2014) जैसी फिल्मों में सपोर्टिंग रोल किए और फिल्म मेकिंग की बारीकियों को समझा।
- डायरेक्शन में कदम: 2016 में उन्होंने फिल्म ‘रिकी’ से निर्देशन में डेब्यू किया, लेकिन उन्हें असली पहचान मिली ब्लॉकबस्टर ‘किरिक पार्टी’ से, जिसने कन्नड़ सिनेमा में एक नए युग की शुरुआत की।
ऋषभ शेट्टी की पहचान केवल एक कमर्शियल फिल्म मेकर के रूप में नहीं, बल्कि एक संजीदा कहानीकार के रूप में भी हुई।
- पहला नेशनल अवॉर्ड: उनकी फिल्म सरकारी हि. प्रा. शाले, कासरगोडु (2018) ने ‘बेस्ट चिल्ड्रन्स फिल्म’ का नेशनल अवॉर्ड जीता।
- कांतारा का जादू: 2022 में रिलीज हुई ‘कांतारा’ ने ऋषभ के करियर और भारतीय सिनेमा की दिशा बदल दी। उन्होंने इस फिल्म को लिखा, डायरेक्ट किया और इसमें मुख्य भूमिका निभाई।
- वैश्विक पहचान: ‘कांतारा’ एक कल्चरल फेनोमेनन बन गई, जिसके लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। साथ ही फिल्म को ‘बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइडिंग होलसम एंटरटेनमेंट’ का सम्मान भी प्राप्त हुआ।
ऋषभ शेट्टी को आज के दौर का राज कपूर या गुरु दत्त कहा जाए तो गलत नहीं होगा। वे उन गिने-चुने कलाकारों में शामिल हैं जो एक्टिंग, राइटिंग और डायरेक्शन—इन तीनों मोर्चों पर खुद को साबित कर चुके हैं।
- कांतारा: चैप्टर 1: उनकी सफलता का सिलसिला कांतारा: चैप्टर 1 के साथ जारी रहा, जिसने न केवल बॉक्स ऑफिस पर अपना दबदबा बनाया, बल्कि पैन-इंडिया स्तर पर ऋषभ की मौजूदगी को और भी मजबूत कर दिया। उनकी फिल्में अपनी जमीन, संस्कृति और लोक कथाओं से जुड़ी होती हैं, जो दर्शकों के साथ गहरा जुड़ाव बनाती हैं।
| वर्ष | उपलब्धि/फिल्म | भूमिका |
| 2012-14 | तुगलक, लूसिया, उलिदावरु कंडंते | सपोर्टिंग एक्टर / सहायक |
| 2016 | किरिक पार्टी | निर्देशक (ब्लॉकबस्टर) |
| 2018 | सरकारी हि. प्रा. शाले | नेशनल अवॉर्ड (चिल्ड्रन्स फिल्म) |
| 2022 | कांतारा | लेखक, निर्देशक, अभिनेता (नेशनल अवॉर्ड) |
| 2024-25 | कांतारा: चैप्टर 1 | ग्लोबल सुपरस्टार |
ऋषभ शेट्टी की कहानी हमें सिखाती है कि यदि आपकी जड़ें अपनी मिट्टी से जुड़ी हों और आपके पास कहने के लिए एक ईमानदार कहानी हो, तो सफलता के शिखर तक पहुँचने से आपको कोई नहीं रोक सकता। साधारण गांव से निकलकर नेशनल आइकन बनने तक का उनका यह सफर आने वाली पीढ़ियों के फिल्म मेकर्स के लिए एक टेक्स्टबुक की तरह है।
