न्यूज स्कूप : सनातन धर्म में रुद्राक्ष (Rudraksha) को न केवल एक आभूषण बल्कि साक्षात भगवान शिव का अंश माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति महादेव के आंसुओं से हुई है, इसलिए इसे धारण करने वाले व्यक्ति पर शिव की विशेष अनुकंपा बनी रहती है। ज्योतिष शास्त्र और आयुर्वेद में भी रुद्राक्ष के आध्यात्मिक और स्वास्थ्य संबंधी अनगिनत लाभ बताए गए हैं।
हालांकि, रुद्राक्ष जितना पवित्र है, इसे धारण करने के नियम भी उतने ही सख्त हैं। अक्सर लोग अनजाने में रुद्राक्ष पहन तो लेते हैं, लेकिन शास्त्रों में बताए गए नियमों की अनदेखी कर देते हैं। ऐसी स्थिति में शुभ फल मिलने के बजाय जीवन में नकारात्मकता बढ़ सकती है। आज हम आपको बता रहे हैं कि रुद्राक्ष को धारण करने की सही विधि और नियम क्या हैं।
बाजार से रुद्राक्ष खरीदकर सीधे गले में डाल लेना अनुचित माना जाता है। इसे पहनने से पहले ‘सिद्ध’ करना अनिवार्य है:
- शुद्धिकरण: सबसे पहले रुद्राक्ष को गंगाजल या कच्चे दूध से स्नान कराएं। इससे इसकी अशुद्धियां दूर होती हैं और यह ऊर्जामय बनता है।
- प्राण प्रतिष्ठा: शुद्ध करने के बाद इसे पंचामृत से धोएं और धूप-दीप दिखाएं। भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का कम से कम 108 बार जाप करें।
- शिवलिंग का स्पर्श: यदि संभव हो, तो रुद्राक्ष को पास के किसी मंदिर में ले जाकर शिवलिंग से स्पर्श कराएं। इससे इसमें सात्विक ऊर्जा का संचार होता है।
शास्त्रों के अनुसार, रुद्राक्ष को किसी भी सामान्य दिन पहनने के बजाय विशेष तिथियों पर धारण करना चाहिए:
- सोमवार: भगवान शिव का प्रिय दिन।
- सावन का महीना: रुद्राक्ष धारण के लिए सर्वोत्तम काल।
- महाशिवरात्रि या मासिक शिवरात्रि: इस दिन रुद्राक्ष पहनना सबसे अधिक फलदायी है।
- पूर्णिमा और अमावस्या: इन तिथियों पर भी ग्रहों की स्थिति अनुकूल होती है।
- साफ-सफाई: रुद्राक्ष में धूल या गंदगी जमा न होने दें। समय-समय पर इसे साफ करें और हल्का तेल (सरसों या तिल का तेल) लगाएं ताकि यह फटे नहीं।
- अदला-बदली न करें: अपना पहना हुआ रुद्राक्ष कभी किसी दूसरे को न दें और न ही किसी दूसरे का रुद्राक्ष खुद पहनें। प्रत्येक रुद्राक्ष पहनने वाले की ऊर्जा को सोख लेता है।
- मर्यादा का पालन: शास्त्रों के अनुसार, श्मशान घाट जाते समय या शारीरिक संबंध बनाते समय रुद्राक्ष को उतार देना चाहिए। मांस-मदिरा का सेवन करने वालों को रुद्राक्ष धारण करने से बचना चाहिए।
- लाल धागा या धातु: रुद्राक्ष को हमेशा लाल धागे, सोने या चांदी की चेन में ही धारण करना शुभ माना जाता है। काले धागे का प्रयोग वर्जित है।
- मानसिक शांति: इसे धारण करने से तनाव कम होता है और मन में सकारात्मक विचार आते हैं।
- एकाग्रता (Concentration): विद्यार्थियों और बुद्धिजीवियों के लिए रुद्राक्ष धारण करना एकाग्रता बढ़ाने में सहायक होता है।
- नकारात्मकता से रक्षा: यह बुरी नजर, तंत्र-मंत्र और नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को कम करता है।
- ग्रह दोष निवारण: अलग-अलग मुखी रुद्राक्ष (एक मुखी से लेकर चौदह मुखी तक) विभिन्न ग्रहों के दुष्प्रभावों को दूर करने में मदद करते हैं।
रुद्राक्ष भगवान शिव का आशीर्वाद है, लेकिन इसकी गरिमा और नियमों का पालन करना हमारी जिम्मेदारी है। यदि आप पूरी श्रद्धा और सही नियमों के साथ इसे धारण करते हैं, तो आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास निश्चित है।
