20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : दिल्ली का सरोजनी नगर मार्केट कपड़ों के शौकीनों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। ₹100 से ₹200 में ब्रांडेड दिखने वाले कपड़े, लेटेस्ट ट्रेंडी शूज और एक्सेसरीज यहां आसानी से मिल जाते हैं। कॉलेज स्टूडेंट्स से लेकर दूर-दराज से आने वाले टूरिस्ट्स तक, यह मार्केट सबकी पहली पसंद है। लेकिन, हाल ही में मशहूर कथावाचक शिवम साधक महाराज के एक बयान ने इस मार्केट से शॉपिंग करने वालों के मन में डर और सवाल पैदा कर दिए हैं।

आइए जानते हैं कि आखिर सरोजनी नगर के कपड़ों का सच क्या है और क्या वाकई इन्हें पहनना खतरनाक हो सकता है।

आखिर इतने सस्ते कपड़े आते कहां से हैं?

बाजार के जानकारों और दुकानदारों से की गई बातचीत में दो अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं:

1. फैक्ट्री रिजेक्ट और एक्सपोर्ट सरप्लस: ज्यादातर दुकानदारों का कहना है कि ये कपड़े बड़े ब्रांड्स और एक्सपोर्ट फैक्ट्रियों से आते हैं। जब किसी कपड़े में सिलाई (Stitching), फिटिंग या लेबल से जुड़ी छोटी-सी भी गड़बड़ी होती है, तो ब्रांड उसे रिजेक्ट कर देते हैं। ये ‘रिजेक्टेड’ माल थोक में बहुत कम कीमतों पर बेचा जाता है, जिसे दुकानदार सरोजनी जैसे बाजारों में लेकर आते हैं।

2. कथावाचक शिवम साधक का चौंकाने वाला दावा: शिवम साधक महाराज के अनुसार, ये कपड़े केवल फैक्ट्री रिजेक्ट नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि विदेशों में लोग कपड़े पहनकर फेंक देते हैं या दान कर देते हैं। ये कपड़े कंटेनरों में भरकर भारत आते हैं। महाराज का कहना है कि—

“हो सकता है उन कपड़ों में किसी की अधूरी इच्छाएं छिपी हों या वे किसी मृतक के हों। ऐसे कपड़े पहनकर आप न केवल नकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक संकट को बुलावा दे रहे हैं, बल्कि बीमारियों का भी खतरा मोल ले रहे हैं।”

क्या है बचाव का तरीका?

शिवम साधक महाराज ने सलाह दी है कि यदि आप ऐसे कपड़े खरीदते हैं, तो उन्हें सीधे पहनने की गलती न करें। इन्हें सबसे पहले नमक वाले पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। वास्तु के अनुसार, नमक नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है, जिससे कपड़ों का बुरा प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है।

थोक बाजार और दुकानदारों की राय

जब इस बारे में स्थानीय दुकानदारों से बात की गई, तो उन्होंने ‘मृतकों के कपड़ों’ वाली बात को पूरी तरह अफवाह बताया। उन्होंने बताया:

  • रघुबीर नगर कनेक्शन: दिल्ली के रघुबीर नगर में सुबह 3 बजे थोक मंडी सजती है, जहां से ये माल खरीदा जाता है।
  • हाइजीन की कमी: दुकानदार स्वीकार करते हैं कि थोक में आने के कारण ये कपड़े अक्सर गंदे होते हैं और इन्हें बोरे में ठूंसकर रखा जाता है, जिससे इनमें सिलवटें और गंदगी जमा हो जाती है।

सरोजनी नगर से शॉपिंग करना गलत नहीं है, लेकिन हाइजीन (साफ-सफाई) के नजरिए से सावधानी जरूरी है। चाहे वे फैक्ट्री रिजेक्ट हों या पुराने कपड़े, उनमें केमिकल और धूल-मिट्टी की मात्रा अधिक हो सकती है। इसलिए इन्हें पहनने से पहले गरम पानी, डिटर्जेंट और कीटाणुनाशक (जैसे डेटॉल) से साफ करना स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों के लिए बेहतर है।

By News Scoop Desk

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