न्यूज स्कूप : देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के ऋणदाता, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपने करोड़ों ग्राहकों के लिए एटीएम ट्रांजैक्शन से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है। यदि आप भी एसबीआई के ग्राहक हैं और सुविधा के लिए अपने पास के किसी अन्य बैंक (नॉन-एसबीआई) के एटीएम का इस्तेमाल करते हैं, तो अब आपको अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी।
बैंक ने इंटरचेंज फीस (Interchange Fee) में हुई बढ़ोतरी का हवाला देते हुए एटीएम शुल्क में इजाफा किया है। यह बदलाव विशेष रूप से उन लोगों को प्रभावित करेगा जो महीने में कई बार एटीएम से निकासी या बैलेंस चेक करते हैं।
एसबीआई ने सबसे बड़ा बदलाव सैलरी अकाउंट (Salary Account) रखने वाले ग्राहकों के लिए किया है। अब तक इन ग्राहकों को दूसरे बैंक के एटीएम से अनलिमिटेड (असीमित) मुफ्त लेनदेन की सुविधा मिलती थी, लेकिन अब इसे सीमित कर दिया गया है।
- नई सीमा: अब सैलरी अकाउंट होल्डर्स महीने में केवल 10 बार ही दूसरे बैंक के एटीएम पर मुफ्त लेनदेन कर पाएंगे।
- शर्त: इस 10 ट्रांजैक्शन की सीमा में वित्तीय (कैश निकालना) और गैर-वित्तीय (बैलेंस चेक या पिन बदलना) दोनों तरह के लेनदेन शामिल होंगे। निर्धारित सीमा पार होने के बाद हर ट्रांजैक्शन पर चार्ज देना होगा।
बचत खाता (Saving Account) रखने वाले ग्राहकों के लिए मुफ्त ट्रांजैक्शन की संख्या तो वही है, लेकिन सीमा खत्म होने के बाद लगने वाले शुल्क को बढ़ा दिया गया है।
| ट्रांजैक्शन का प्रकार | मुफ्त सीमा (महीने में) | सीमा के बाद नया चार्ज (प्रति ट्रांजैक्शन) |
| कैश निकासी (Cash Withdrawal) | 5 बार | ₹23 + GST (पहले ₹21 था) |
| गैर-वित्तीय (Non-Financial) | 5 बार | ₹11 + GST (बैलेंस चेक/मिनी स्टेटमेंट) |
नोट: बैंक ने स्पष्ट किया है कि इंटरचेंज फीस वह राशि है जो एसबीआई उस बैंक को देता है जिसका एटीएम उसके ग्राहक ने इस्तेमाल किया है। लागत बढ़ने के कारण यह बोझ अब ग्राहकों पर डाला गया है।
राहत की बात यह है कि बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट (BSBD) अकाउंट रखने वाले ग्राहकों पर इन नए शुल्कों का असर नहीं पड़ेगा। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खुले खातों और कम आय वाले समूहों के लिए बैंक ने पुराने नियमों को ही यथावत रखा है। इन खाताधारकों के लिए फिलहाल किसी नए अतिरिक्त चार्ज की घोषणा नहीं की गई है।
एटीएम पर लगने वाले इन भारी-भरकम चार्ज से बचने के लिए विशेषज्ञ कुछ सुझाव देते हैं:
- SBI ATM का उपयोग: कोशिश करें कि एसबीआई के खुद के एटीएम नेटवर्क का ही इस्तेमाल करें, जहाँ अक्सर ज्यादा फ्री ट्रांजैक्शन मिलते हैं।
- कैशलेस ट्रांजैक्शन: यूपीआई (UPI), नेट बैंकिंग और डेबिट कार्ड स्वाइप का अधिक उपयोग करें ताकि बार-बार कैश निकालने की जरूरत न पड़े।
- एक बार में अधिक निकासी: बार-बार ₹500 या ₹1000 निकालने के बजाय महीने की जरूरत का कैश एक-दो बार में ही निकाल लें।
- डिजिटल पासबुक: बैलेंस चेक करने के लिए एटीएम जाने के बजाय YONO App या SBI Quick मिस्ड कॉल सेवा का उपयोग करें।
निष्कर्ष: बैंकिंग सेवाओं का महंगा होना डिजिटल इकोनॉमी की ओर बढ़ता एक और कदम है। एसबीआई के इस फैसले के बाद निजी बैंक भी जल्द ही अपने चार्जेस में बदलाव कर सकते हैं। ग्राहकों को अब अपनी बैंकिंग आदतों को अधिक ‘स्मार्ट’ बनाने की जरूरत है।
- नई सीमा: अब सैलरी अकाउंट होल्डर्स महीने में केवल 10 बार ही दूसरे बैंक के एटीएम पर मुफ्त लेनदेन कर पाएंगे।
- शर्त: इस 10 ट्रांजैक्शन की सीमा में वित्तीय (कैश निकालना) और गैर-वित्तीय (बैलेंस चेक या पिन बदलना) दोनों तरह के लेनदेन शामिल होंगे। निर्धारित सीमा पार होने के बाद हर ट्रांजैक्शन पर चार्ज देना होगा।
बचत खाता (Saving Account) रखने वाले ग्राहकों के लिए मुफ्त ट्रांजैक्शन की संख्या तो वही है, लेकिन सीमा खत्म होने के बाद लगने वाले शुल्क को बढ़ा दिया गया है।
| ट्रांजैक्शन का प्रकार | मुफ्त सीमा (महीने में) | सीमा के बाद नया चार्ज (प्रति ट्रांजैक्शन) |
| कैश निकासी (Cash Withdrawal) | 5 बार | ₹23 + GST (पहले ₹21 था) |
| गैर-वित्तीय (Non-Financial) | 5 बार | ₹11 + GST (बैलेंस चेक/मिनी स्टेटमेंट) |
नोट: बैंक ने स्पष्ट किया है कि इंटरचेंज फीस वह राशि है जो एसबीआई उस बैंक को देता है जिसका एटीएम उसके ग्राहक ने इस्तेमाल किया है। लागत बढ़ने के कारण यह बोझ अब ग्राहकों पर डाला गया है।
राहत की बात यह है कि बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट (BSBD) अकाउंट रखने वाले ग्राहकों पर इन नए शुल्कों का असर नहीं पड़ेगा। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खुले खातों और कम आय वाले समूहों के लिए बैंक ने पुराने नियमों को ही यथावत रखा है। इन खाताधारकों के लिए फिलहाल किसी नए अतिरिक्त चार्ज की घोषणा नहीं की गई है।
एटीएम पर लगने वाले इन भारी-भरकम चार्ज से बचने के लिए विशेषज्ञ कुछ सुझाव देते हैं:
- SBI ATM का उपयोग: कोशिश करें कि एसबीआई के खुद के एटीएम नेटवर्क का ही इस्तेमाल करें, जहाँ अक्सर ज्यादा फ्री ट्रांजैक्शन मिलते हैं।
- कैशलेस ट्रांजैक्शन: यूपीआई (UPI), नेट बैंकिंग और डेबिट कार्ड स्वाइप का अधिक उपयोग करें ताकि बार-बार कैश निकालने की जरूरत न पड़े।
- एक बार में अधिक निकासी: बार-बार ₹500 या ₹1000 निकालने के बजाय महीने की जरूरत का कैश एक-दो बार में ही निकाल लें।
- डिजिटल पासबुक: बैलेंस चेक करने के लिए एटीएम जाने के बजाय YONO App या SBI Quick मिस्ड कॉल सेवा का उपयोग करें।
बैंकिंग सेवाओं का महंगा होना डिजिटल इकोनॉमी की ओर बढ़ता एक और कदम है। एसबीआई के इस फैसले के बाद निजी बैंक भी जल्द ही अपने चार्जेस में बदलाव कर सकते हैं। ग्राहकों को अब अपनी बैंकिंग आदतों को अधिक ‘स्मार्ट’ बनाने की जरूरत है।
