20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : भारतीय राजनीति के एक शांत, संयत और बेहद अनुभवी नेता, कांग्रेस के सीनियर लीडर और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का शुक्रवार, 12 दिसंबर को लातूर में 90 साल की उम्र में निधन हो गया।

पाटिल ने लंबी बीमारी के कारण सुबह करीब 6:30 बजे लातूर स्थित अपने आवास पर आखिरी सांस ली, जहां वे घर पर ही देखरेख में थे। उनके निधन की खबर से पूरे महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति में शोक का माहौल छा गया है। पाटिल को भारतीय राजनीति में उनकी मेहनती छवि और संयमित व्यवहार के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

जीवन और शिक्षा

शिवराज पाटिल का जन्म 12 अक्टूबर 1935 को महाराष्ट्र के लातूर जिले के चाकुर गांव में हुआ था। अपनी प्रारंभिक पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने पहले आयुर्वेद का अभ्यास किया। इसके बाद उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से कानून (Law) की शिक्षा ली, जिसने उनके राजनीतिक करियर की नींव रखी। राजनीति में उनका सफर 1967 में शुरू हुआ, जब उन्होंने लातूर नगर पालिका में कार्यभार संभाला।

शानदार सियासी सफर

शिवराज पाटिल का राजनीतिक करियर बेहद लंबा और प्रभावशाली रहा:

  • संसदीय सफलता: 1980 में वे पहली बार लातूर लोकसभा सीट से सांसद बने। इसके बाद, उन्होंने लगातार सात बार इसी सीट से जीत हासिल की, जो उन्हें महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली नेताओं में जगह दिलाती है।
  • केंद्रीय मंत्री पद: इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विभागों में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी निभाई। इनमें रक्षा, वाणिज्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अंतरिक्ष जैसे अहम विभाग शामिल थे।
  • लोकसभा स्पीकर (1991-1996): शिवराज पाटिल 1991 से 1996 तक लोकसभा के स्पीकर रहे। उनके कार्यकाल को भारतीय संसद के तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव का एक अहम दौर माना जाता है। उन्होंने लोकसभा के आधुनिकीकरण, कंप्यूटरीकरण, कार्यवाही के सीधा प्रसारण (Live Telecasting) और नई लाइब्रेरी बिल्डिंग के निर्माण जैसे कामों को तेजी दी।

गृह मंत्री और नैतिक जिम्मेदारी

2004 में लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद, उन्हें केंद्र में गृह मंत्री (Union Home Minister) बनाया गया। हालांकि, उनके कार्यकाल के दौरान 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद, उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

बाद में, उन्हें पंजाब का गवर्नर (राज्यपाल) और चंडीगढ़ का प्रशासक बनाया गया, जहां उन्होंने 2010 से 2015 तक सफलतापूर्वक अपनी सेवाएं दीं।

उनके निधन से भारतीय राजनीति ने एक ऐसा नेता खो दिया है जिसने निष्ठा और शांति के साथ देश की सेवा की।

By News Scoop Desk

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