द लोकतंत्र : स्पोर्ट्स शूज अब सिर्फ एथलीटों तक ही सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि मॉर्डन लाइफस्टाइल में ये लोगों के पसंदीदा फुटवियर बन गए हैं। फिटनेस फ्रीक लोग रनिंग, वर्कआउट और अन्य फिजिकल एक्टिविटी के लिए इन्हें वियर करते हैं, क्योंकि दौड़ने से लेकर चलने तक, स्पोर्ट्स शूज की बढ़िया ग्रिप, लाइट फील और फ्लेक्सिबल बनावट पैरों पर कम प्रेशर डालती है, जिससे मसल्स में चोट की संभावना कम रहती है।
बेशक बड़े ब्रांड्स अलग-अलग खेलों के मुताबिक स्पेशल डिजाइन के स्पोर्ट्स शूज तैयार करते हैं, जो खिलाड़ियों को बेहतर परफॉर्मेंस में मददगार होते हैं। हालांकि, अगर आप भी स्पोर्ट्स शूज खरीदना चाहते हैं, तो कुछ बातों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। स्पोर्ट्स शूज स्टाइलिश लुक के लिए नहीं, बल्कि सपोर्ट और टिकाऊपन के लिए खरीदे जाते हैं। एक छोटी सी गलती भी आपके पैसे बेकार कर सकती है और पैरों को नुकसान पहुंचा सकती है।
चलिए, जानते हैं कि आपको किन चार बातों का खास ध्यान रखना चाहिए:
स्पोर्ट्स शूज खरीदते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि आप सिर्फ सही फिटिंग पर ध्यान न दें, बल्कि आपको अपने पैर के तलवे (Sole) की बनावट के हिसाब से शूज खरीदने हैं। कुछ लोगों के पैर के तलवे बिल्कुल सपाट (Flat Feet) होते हैं, जबकि कुछ के तलवों में बीच का हिस्सा खाली (High Arch) होता है। हर तरह के तलवे को अलग तरह के सपोर्ट की जरूरत होती है।
- आप शॉपकीपर से कहकर अपने पैर के तलवे के अनुसार परफेक्ट जूते निकलवा सकते हैं। गलत तलवे की बनावट वाले जूते पहनने से आपको रनिंग या वॉकिंग में दिक्कत हो सकती है और लंबे समय में जोड़ों पर गलत प्रेशर पड़ सकता है।
अक्सर लोग जूते की डिजाइन और बाहरी सोल की मजबूती देखकर उसे तुरंत पसंद कर लेते हैं, लेकिन अंदर से कुशनिंग को नजरअंदाज कर देते हैं। स्पोर्ट्स शूज खरीदते वक्त की गई यह गलती आपके ऊपर भारी पड़ सकती है। जब तक शूज अंदर से कंफर्टेबल नहीं होंगे, तब तक आपको हमेशा पहनने के दौरान दर्द या चुभन महसूस होगी।
याद रखें, जरूरी नहीं कि ट्रेंडी डिजाइन वाले और बाहरी रूप से मजबूत सोल वाले जूते आपके रनिंग स्टाइल या बॉडी वेट के लिए परफेक्ट हों। जूते में पर्याप्त कुशनिंग शॉक एब्जॉर्प्शन (झटके सहने) में मदद करती है, खासकर जब आप कठोर सतहों पर दौड़ रहे हों।
यह सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक है। हर खेल या वर्कआउट के लिए एक जैसे शूज परफेक्ट नहीं रहते हैं।
- रनिंग शूज: इनमें आमतौर पर ज्यादा कुशनिंग और अच्छी ग्रिप होती है।
- जिम/क्रॉस ट्रेनिंग शूज: इनमें लेटरल मूवमेंट (साइड से साइड) को सपोर्ट करने के लिए ज्यादा स्थिरता (Stability) होती है।
- ट्रेकिंग शूज: ये टखने को सपोर्ट देते हैं और ऊबड़-खाबड़ रास्तों के लिए मजबूत और गहरे खांचे वाले होते हैं।
अगर आप रनिंग वाले शूज पहनकर बास्केटबॉल खेलेंगे या जिम वाले शूज पहनकर ट्रेकिंग करेंगे, तो चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए, आप जिस एक्टिविटी के लिए शूज ले रहे हैं, उसको ध्यान में रखकर ही विशेष डिजाइन वाले जूते चुनें।
स्पोर्ट्स शूज खरीदते वक्त हम सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि नॉर्मल फुटवियर की तरह सिर्फ पहनकर साइज चेक कर लेते हैं या फिर पहनकर सिर्फ खड़े होकर देखते हैं।
सही तरीका यह है कि आप जूते पहनकर दुकान में थोड़ा सा चलकर देखें, जॉगिंग करें या कुछ देर खड़े रहकर महसूस करें। इससे आपको यह आइडिया लग सकेगा कि शूज पूरी तरह से कंफर्टेबल हैं या नहीं। कई बार हम थोड़ी सी ज्यादा या कम फिटिंग के जूते खरीद लेते हैं, जिससे चलने या दौड़ने पर पैरों में छाले पड़ने या दर्द की समस्या हो सकती है। सही फिटिंग और सपोर्ट, स्पोर्ट्स शूज का मुख्य उद्देश्य है।
