न्यूज स्कूप : उत्तर प्रदेश की सुल्तानपुर जिला कारागार एक बार फिर विवादों के घेरे में है। जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने से हड़कंप मच गया है। मृतक के परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे सोची-समझी हत्या करार दिया है, जबकि जेल अधिकारियों का कहना है कि बंदी की मौत दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ने से हुई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
मृतक की पहचान शैलेंद्र सिंह के रूप में हुई है, जो पड़ोसी जिले अमेठी के रहने वाले थे। शैलेंद्र पिछले करीब 10 महीनों (27 मार्च से) से सुल्तानपुर जिला जेल में बंद थे। जानकारी के मुताबिक, शनिवार सुबह धम्मौर एसएचओ के माध्यम से परिजनों को सूचना मिली कि शैलेंद्र की मौत हो गई है।
मृतक के रिश्ते के भाई आशीष सिंह ने बताया कि जब उन्होंने पुलिस से मौत की वजह पूछी, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। पुलिस अधिकारियों ने केवल इतना कहा कि इस बारे में जेलर ही स्पष्ट जानकारी दे पाएंगे।
परिजनों का दावा है कि शैलेंद्र पूरी तरह स्वस्थ थे और उन्हें कोई पुरानी बीमारी नहीं थी। आशीष सिंह ने मीडिया से बातचीत में कई सवाल उठाए:
- रात में हुई थी बात: परिजनों के अनुसार, शुक्रवार रात को ही शैलेंद्र ने अपनी पत्नी से फोन पर बात की थी। उस समय वह बिल्कुल ठीक थे और उन्होंने किसी भी तरह की शारीरिक परेशानी का जिक्र नहीं किया था।
- अस्पताल पहुँचने से पहले मौत: जब परिजन अस्पताल पहुँचे, तो उन्हें डॉक्टरों ने बताया कि शैलेंद्र को ‘ब्रॉट डेड’ (लाने से पहले ही मौत) अवस्था में लाया गया था। इससे परिजनों को शक है कि उनकी मौत जेल के भीतर ही हो चुकी थी।
- नियमित मुलाकात: आशीष ने बताया कि वे महीने में 2-3 बार और शैलेंद्र की पत्नी हफ्ते में दो बार जेल जाकर उनसे मिलती थीं। पेशी के दौरान भी उन्होंने कभी अपनी सेहत को लेकर शिकायत नहीं की थी।
शैलेंद्र सिंह करीब 20 साल पुराने हत्या के प्रयास के एक मामले में आरोपी थे। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन था और अभी तक उन्हें दोषी करार नहीं दिया गया था।
- जेल की अवधि: वह 27 मार्च से सुल्तानपुर जेल में निरुद्ध थे।
- अगली सुनवाई: आगामी 19 जनवरी को कोर्ट में उनकी पेशी होनी थी, लेकिन उससे पहले ही उनकी मौत की खबर आ गई।
परिजनों का आरोप है कि जेल के भीतर उनके साथ कुछ अनहोनी हुई है, जिसे हार्ट अटैक का नाम देकर दबाने की कोशिश की जा रही है।
सुल्तानपुर पुलिस और जिला प्रशासन ने मामले की न्यायिक जांच के संकेत दिए हैं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल पाएगा। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई जा सकती है ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहे। फिलहाल, जेल के भीतर शैलेंद्र के साथ रहने वाले अन्य बंदियों से भी पूछताछ की जा रही है।
जेलों में बंदियों की मौत के बढ़ते मामले मानवाधिकार और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं। क्या यह वास्तव में एक आकस्मिक मौत थी या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है, यह तो विस्तृत जांच के बाद ही साफ होगा।
