7 Feb 2026, Sat
Breaking

न्यूज स्कूप : डिजिटल युग में नागरिकों की निजता के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक ऐतिहासिक और कड़ा रुख अपनाया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने व्हाट्सएप और मेटा की विवादित प्राइवेसी पॉलिसी पर सुनवाई करते हुए कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे एक लिखित हलफनामा दाखिल करें। इसमें यह साफ तौर पर लिखा होना चाहिए कि वे यूजर्स का व्यक्तिगत डेटा साझा नहीं करेंगे।

अदालत ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि व्हाट्सएप और मेटा ऐसा हलफनामा देने में विफल रहते हैं, तो उनकी याचिका को तुरंत खारिज कर दिया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यावसायिक लाभ के लिए भारतीय नागरिकों के अधिकारों की बलि नहीं दी जा सकती।

‘डेटा का है मौद्रिक मूल्य’, कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने डेटा की प्राइवेसी के साथ-साथ उसके मुद्रीकरण (Monetization) पर भी अहम टिप्पणी की।

  • सीजेआई की चेतावनी: जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि प्लेटफॉर्म की वर्तमान प्राइवेसी पॉलिसी भ्रामक और आम लोगों के लिए समझने में बेहद कठिन है। उन्होंने सवाल किया कि एक गरीब बुजुर्ग महिला या कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति इन जटिल शर्तों को कैसे समझेगा?
  • डेटा का मूल्य: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि डेटा का एक ‘मौद्रिक मूल्य’ होता है। इस पर जस्टिस बागची ने DPDP Act (डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट) का संदर्भ देते हुए कहा कि यदि डेटा साझा करने का कोई मूल्य तय नहीं है, तो इसके उपयोग की जांच जरूरी है कि प्लेटफॉर्म विज्ञापनों और ट्रेंड्स के लिए इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं।

क्या है पूरा विवाद? (CCI vs Meta)

यह पूरा मामला भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा मेटा पर लगाए गए 213 करोड़ रुपये के जुर्माने से जुड़ा है।

  1. वर्चस्व का दुरुपयोग: सीसीआई ने पाया था कि मेटा ने मैसेजिंग बाजार में अपने वर्चस्व का दुरुपयोग किया और व्हाट्सएप डेटा को फेसबुक/इंस्टाग्राम के साथ साझा करने की नीति बनाई।
  2. NCLAT का आदेश: जब मेटा ने इसके खिलाफ अपील की, तो एनसीएलएटी ने सीसीआई के जुर्माने को बरकरार रखा। इसके बाद कंपनियां राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं।
  3. कोर्ट का रुख: सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने के बजाय सुरक्षा नियमों के कड़ाई से पालन की बात दोहराई और सूचित सहमति (Informed Consent) को अनिवार्य बताया।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां: मुख्य बिंदु

विषयकोर्ट की टिप्पणी
प्राइवेसी पॉलिसीभ्रामक और जटिल, आम आदमी की समझ से परे।
डेटा शेयरिंगबिना लिखित हलफनामे के डेटा साझा करना स्वीकार्य नहीं।
नागरिक अधिकारदेश के नागरिकों के अधिकार किसी भी कंपनी से ऊपर हैं।
चेतावनीहलफनामा न देने पर याचिका को खारिज माना जाए।

‘सफेदपोश’ तकनीकी शर्तों पर कड़ा ऐतराज

अदालत ने व्हाट्सएप की शर्तों और प्राइवेसी पॉलिसी की भाषा पर गंभीर आपत्ति जताई। सीजेआई ने कहा कि सूचित सहमति का मतलब तब तक कुछ नहीं है जब तक यूजर को यह पता न हो कि उसके डेटा के साथ क्या किया जा रहा है। पीठ ने कहा कि किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म को भारत के संविधान के दायरे में रहकर ही काम करना होगा और निजता का अधिकार सर्वोपरि है।

सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती भारत में डेटा प्रोटेक्शन के भविष्य के लिए एक मिसाल है। यह साफ संदेश है कि अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियां भारतीय बाजार में व्यापार तो कर सकती हैं, लेकिन वे यहाँ के कानून और नागरिकों की प्राइवेसी के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकतीं।

By News Scoop Desk

News Scoop is a digital news platform that focuses on delivering exclusive, fast, verified and impactful stories to readers. Unlike traditional news portals that rely heavily on routine reports, a news scoop platform prioritizes breaking news, inside information, investigative leads, political developments, public interest stories and viral happenings fresh and first.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *