न्यूज स्कूप : देश के राजनीतिक और कानूनी गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज के पिता, वरिष्ठ अधिवक्ता और मिजोरम के पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल का गुरुवार (आज) को 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका आकस्मिक निधन राजनीतिक हलकों के लिए एक बड़ी क्षति है।
स्वराज कौशल का जन्म मूलरूप से हिमाचल प्रदेश के सोलन में 12 जुलाई 1952 को हुआ था। दिल्ली बीजेपी ने अपने आधिकारिक एक्स (X) हैंडल पर पोस्ट के माध्यम से उनके निधन की जानकारी दी है। वर्तमान में, उनके आवास पर बीजेपी सहित अन्य दलों के नेताओं का जमावड़ा लगा हुआ है।
स्वराज कौशल देश के जाने-माने अधिवक्ता रहे हैं, जिनकी वकालत के क्षेत्र में बड़ी साख थी। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी और पंजाब यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी की थी और सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े वकील माने जाते थे। उनका राजनीतिक करियर भी अत्यंत उल्लेखनीय रहा:
- राज्यपाल: स्वराज कौशल ने मिजोरम के राज्यपाल की जिम्मेदारी भी संभाली थी। वह सबसे कम आयु में राज्यपाल का पद प्राप्त करने वाले व्यक्तियों में से एक बने थे, जो उनके असाधारण करियर को दर्शाता है।
- राज्यसभा सांसद: राज्यपाल का पद संभालने के अलावा, वह करीब 6 सालों तक राज्यसभा सांसद भी रहे थे।
स्वराज कौशल का विवाह 1975 में दिग्गज भाजपा नेता स्वर्गीय सुषमा स्वराज के साथ हुआ था, जो बाद में देश की विदेश मंत्री और दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं। अगस्त 2019 में सुषमा स्वराज का निधन हो गया था। अब, उनकी बेटी बांसुरी स्वराज नई दिल्ली सीट से भारतीय जनता पार्टी की सांसद हैं।
स्वराज कौशल का जाना, एक ऐसे परिवार में हुई दूसरी बड़ी क्षति है, जिसने देश की राजनीति और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
पिता के निधन के बाद, सांसद बांसुरी स्वराज ने एक्स (X) पर एक अत्यंत भावुक संदेश पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने अपने पिता को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा:
“पापा स्वराज कौशल जी, आपका स्नेह, आपका अनुशासन, आपकी सरलता, आपका राष्ट्रप्रेम और आपका अपार धैर्य मेरे जीवन की वह रोशनी हैं जो कभी मंद नहीं होगी। आपका जाना हृदय की सबसे गहरी पीड़ा बनकर उतरा है, पर मन यही विश्वास थामे हुए है कि आप अब माँ के साथ पुनः मिल चुके हैं, ईश्वर के सान्निध्य में, शाश्वत शांति में। आपकी बेटी होना मेरे जीवन का सबसे बड़ा गौरव है, और आपकी विरासत, आपके मूल्य और आपका आशीर्वाद ही मेरी आगे की हर यात्रा का आधार रहेंगे।”
बांसुरी स्वराज का यह संदेश, पिता के प्रति उनके गहरे सम्मान और दिवंगत मां सुषमा स्वराज से उनके पुनर्मिलन की आशा को व्यक्त करता है।
