न्यूज स्कूप : थाईलैंड और कंबोडिया के बीच एक बार फिर सीमा पर भीषण झड़प हुई है, जिसने दोनों देशों के बीच अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम को तोड़ दिया है। थाईलैंड ने सीमा के पास एयर स्ट्राइक की है, जबकि उसका दावा है कि सोमवार (8 दिसंबर) सुबह तड़के 3 बजे कंबोडिया ने थाई सीमा को निशाना बनाना शुरू किया, जिसमें एक थाई सैनिक की मौत हो गई और दो अन्य घायल हुए।
दोनों देश अब एक-दूसरे पर युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं। इस दशकों पुराने संघर्ष के केंद्र में 900 साल पुराना प्रेह विहियर (Preah Vihear) शिव मंदिर और उसके आसपास का सीमा क्षेत्र है।
डांगरेक पर्वतों की चोटी पर स्थित प्राचीन प्रेह विहियर मंदिर (थाईलैंड में फ्रा विहर्ण) सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह थाईलैंड और कंबोडिया के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद का केंद्र बन चुका है। यह 11वीं शताब्दी का खूबसूरत हिंदू मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भी है।
- 1907 का नक्शा: इस विवाद की जड़ 1907 से जुड़ी है, जब फ्रांसीसी शासन के दौरान एक नक्शा बनाया गया था, जिसमें मंदिर को कंबोडिया की सीमा के अंदर रखा गया।
- थाईलैंड का दावा: थाईलैंड का कहना है कि 1907 का फ्रांसीसी नक्शा 1904 की उस संधि को नजरअंदाज करता है, जिसमें सीमा दांगरेक पर्वतों की प्राकृतिक जल विभाजक रेखा (Watershed Line) के अनुसार तय होनी थी। थाई अधिकारियों के मुताबिक, अगर वॉटरशेड लाइन मानी जाए, तो मंदिर थाईलैंड की सीमा के अंदर आता है।
इस विवाद को सुलझाने के लिए मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) तक पहुंचा।
- 1962 का फैसला: 1962 में ICJ ने कंबोडिया के पक्ष में फैसला सुनाया और मंदिर पर उसकी संप्रभुता को मान्यता दी।
- 2013 का फैसला: 2008 में विवाद फिर भड़कने के बाद कंबोडिया ने 2011 में दोबारा ICJ का रुख किया। 2013 में, अदालत ने एक बार फिर पुष्टि की कि मंदिर कंबोडिया का है और इसके तुरंत आसपास का 4.6 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र भी कंबोडिया की संप्रभुता में आता है। हालांकि, थाईलैंड ने भविष्य के विवादों में ICJ की और दखलंदाजी को खारिज कर दिया।
ICJ के फैसलों के बावजूद, मंदिर के आसपास की जमीन को लेकर 2008 से 2011 के बीच कई हिंसक झड़पें हुईं, जिनमें मोर्टार दागे गए।
- हताहत: पिछले महीनों में हुई झड़पों में थाई पक्ष ने 100 से अधिक कंबोडियाई सैनिकों को मार गिराने का दावा किया था, जबकि कंबोडिया ने बताया था कि उनके 21 सैनिक मारे गए, 50 नागरिक घायल हुए और तीन लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए।
- राजनीतिक झटका: यह सीमा विवाद इतना गहराया कि इसका सीधा असर थाईलैंड की राजनीति पर पड़ा। पिछले महीने, थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। यह झटका तब लगा जब थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर हुए विवाद के दौरान उनकी और कंबोडिया के पूर्व पीएम हुन सेन की 17 मिनट की फोन कॉल लीक हो गई। लीक कॉल में पैतोंगतार्न ने हुन सेन को ‘अंकल’ कहा था और थाई सेना के कुछ कमांडरों को ‘आक्रामक’ बताया था।
- अल्पमत में सरकार: इस कॉल से सेना-राजतंत्र-समर्थक समूह नाराज हो गए। इसके बाद भूमजैथाई पार्टी, जो सरकार की सबसे बड़ी सहयोगी थी, गठबंधन से बाहर हो गई और सरकार अल्पमत में आ गई। इसी दबाव के चलते 29 अगस्त को पैतोंगतार्न को पद से हटा दिया गया।
यह संघर्ष दिखाता है कि प्रेह विहियर मंदिर कंबोडिया के लिए खमेर विरासत और गौरव का प्रतीक है, जबकि थाईलैंड के राष्ट्रवादी समूह इसे छिना हुआ राष्ट्रीय इलाका मानते हैं।
