20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी 2026 को संसद में केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। यह उनके कार्यकाल का लगातार नवां बजट होगा। बजट के इस वार्षिक उत्सव के बीच, भारतीय वित्तीय इतिहास के एक सबसे बड़े सुधार की चर्चा अक्सर होती है—वह है रेल बजट का केंद्रीय बजट में विलय

2017 से पहले तक भारत में रेल बजट और आम बजट अलग-अलग पेश किए जाते थे, लेकिन एक बड़े फैसले ने 92 साल से चली आ रही इस औपनिवेशिक परंपरा को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक बदलाव के पीछे की पूरी कहानी।

1924 में क्यों अलग हुआ था रेल बजट?

रेल बजट को अलग से पेश करने की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान 1924 में हुई थी।

  • एक्वर्थ कमेटी की सिफारिश: इस फैसले का आधार 1920-21 की एक्वर्थ कमेटी की रिपोर्ट थी।
  • अर्थव्यवस्था में रेलवे का दबदबा: उस समय भारतीय रेलवे का खर्च सरकार के कुल खर्च का लगभग 84% हुआ करता था। रेलवे न केवल परिवहन का साधन था, बल्कि सैन्य लॉजिस्टिक्स और राजस्व का मुख्य स्रोत भी था। इतने विशाल वित्तीय ढांचे को सामान्य बजट के साथ संभालना उस वक्त मुश्किल था, इसलिए इसे अलग कर दिया गया।

विलय की जरूरत और 2017 का ऐतिहासिक मोड़

आजादी के बाद के दशकों में जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था का विविधीकरण हुआ, कुल सरकारी खर्च में रेलवे का हिस्सा कम होने लगा।

  1. बदलता अनुपात: 2016 तक आते-आते रेलवे का हिस्सा कुल बजट का महज 15% रह गया था। ऐसे में एक अलग बजट की व्यावहारिक आवश्यकता समाप्त हो रही थी।
  2. विवेक देबरॉय समिति: 2016 में नीति आयोग के सदस्य विवेक देबरॉय की अध्यक्षता वाली समिति ने दोनों बजटों को एक करने की सिफारिश की।
  3. पहला संयुक्त बजट: तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 1 फरवरी 2017 को भारत का पहला समेकित (Merged) बजट पेश किया।

रेल बजट के विलय से क्या हुए फायदे?

रेलवे को आम बजट का हिस्सा बनाने से भारतीय रेल और अर्थव्यवस्था दोनों को कई लाभ मिले:

  • डिविडेंड से मुक्ति: विलय से पहले रेलवे को केंद्र सरकार को सालाना डिविडेंड (लाभांश) देना पड़ता था। अब यह राशि बचती है, जिसका उपयोग इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा सुधार में किया जाता है।
  • संसाधनों का कुशल आवंटन: अब वित्त मंत्रालय पूरे देश की जरूरतों को देखते हुए फंड का वितरण ज्यादा बेहतर तरीके से कर पाता है।
  • पारदर्शिता और सरलीकरण: दो अलग भाषणों और बहसों के बजाय अब एक ही व्यापक वित्तीय विवरण पेश किया जाता है, जिससे प्रशासनिक जटिलता कम हुई है।

एक नजर: रेल बजट के सफर पर

कालखंडस्थितिमुख्य विवरण
1924 – 2016अलग रेल बजटऔपनिवेशिक काल की परंपरा, एक्वर्थ कमेटी की सिफारिश।
2016सिफारिशविवेक देबरॉय समिति ने विलय का सुझाव दिया।
2017 – वर्तमानसंयुक्त बजटअरुण जेटली ने पहला संयुक्त बजट पेश किया।
1 फरवरी 2026आगामी बजटनिर्मला सीतारमण का लगातार 9वां बजट भाषण।

बजट 2026 से उम्मीदें

आगामी रविवार को जब वित्त मंत्री सुबह 11:00 बजे अपना भाषण शुरू करेंगी, तो रेलवे के लिए ‘मॉर्डनाइजेशन’, ‘वंदे भारत’ ट्रेनों का विस्तार और ‘रेलवे सुरक्षा’ जैसे बिंदुओं पर विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है। बजटों के इस एकीकरण ने सरकार को एक बड़ा विजन रखने की ताकत दी है, जहाँ परिवहन को समग्र रूप से (PM गति शक्ति के माध्यम से) देखा जा रहा है।

रेल बजट का आम बजट में विलय केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक नए और आधुनिक भारत की उभरती आर्थिक शक्ति का प्रतीक है। 1924 से 2017 तक का यह सफर दिखाता है कि कैसे भारत अपनी पुरानी और बोझिल प्रथाओं को त्यागकर सुधारों के पथ पर आगे बढ़ा है।

By News Scoop Desk

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