28 Feb 2026, Sat
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न्यूज स्कूप : उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज 30 जनवरी 2026 को उस समय बड़ा उबाल आ गया, जब बुंदेलखंड के महोबा में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भीतर की रार बीच सड़क पर दिखाई दी। चरखारी से बीजेपी विधायक बृजभूषण राजपूत ने अपनी ही सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला हाईवे पर रोक कर हंगामा खड़ा कर दिया।

इस घटना ने विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका दे दिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा कि बीजेपी के ‘डबल इंजन’ ही नहीं, बल्कि अब डिब्बे भी आपस में टकरा रहे हैं।

बीच हाईवे पर ‘अपनों’ की जंग: क्या था पूरा मामला?

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह शुक्रवार को महोबा में सरकारी योजनाओं की समीक्षा और कार्यक्रमों में शिरकत करने पहुंचे थे।

  • दीवार बने विधायक: जब मंत्री एक कार्यक्रम से दूसरे की ओर बढ़ रहे थे, तभी विधायक बृजभूषण राजपूत ने करीब 50 ग्राम प्रधानों और सैकड़ों समर्थकों के साथ अपनी गाड़ियों का काफिला हाईवे के बीचों-बीच अड़ा दिया।
  • अधिकारियों की लापरवाही: विधायक का आरोप था कि उनके क्षेत्र के करीब 100 गांवों की सड़कें जल जीवन मिशन के तहत पाइप लाइन डालने के नाम पर खोद दी गई हैं। महीनों बीत जाने के बाद भी मरम्मत न होने से जनता में भारी रोष है और अधिकारी विधायक की बात अनसुनी कर रहे हैं।
  • धक्का-मुक्की और तनाव: पुलिस और प्रशासन के समझाने के बाद भी समर्थकों की नाराजगी कम नहीं हुई। इस दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच जमकर धक्का-मुक्की भी हुई।

अखिलेश यादव का तीखा हमला: “बीजेपी की सत्ता पटरी से उतरी”

इस घटना का वीडियो वायरल होते ही अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा:

“पैसे कमाने और जमीन कब्जाने में लगे बीजेपी के मंत्री हों या विधायक, इनमें से कोई भी जनता के लिए काम नहीं कर रहा है। बीजेपी के विधायक द्वारा अपने ही मंत्री को बंधक बनाना दर्शाता है कि वे अगले चुनाव में हारने वाले हैं। यह तो सिर्फ एक ‘सैंपल’ है, हर विधानसभा में यही हाल है। बीजेपी की सत्ता अब पटरी से उतर गई है।”

समाधान या सिर्फ आश्वासन?

हालात बिगड़ते देख मंत्री स्वतंत्र देव सिंह खुद गाड़ी से उतरे और विधायक को शांत करने के लिए उन्हें अपनी ही गाड़ी में बैठाकर कलेक्ट्रेट ले गए।

  1. आपात बैठक: बंद कमरे में डीएम, एसपी और एडीएम नमामि गंगे के साथ करीब एक घंटे बैठक चली।
  2. 20 दिन का अल्टीमेटम: मंत्री ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए 20 दिनों के भीतर सभी खुदी हुई सड़कों को दुरुस्त करने का आश्वासन दिया है।
  3. विधायक की चेतावनी: बैठक के बाद विधायक बृजभूषण राजपूत ने दोटूक कहा कि यह पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी योजना है और अधिकारियों की लापरवाही से सरकार की छवि खराब हो रही है। यदि 20 दिन में काम नहीं हुआ, तो वे और भी बड़ा कदम उठाएंगे।

महोबा राजनीतिक संकट: एक नजर में

पक्षमुख्य मुद्दाताजा स्थिति
विधायक बृजभूषण राजपूत100 गांवों की खुदी हुई सड़कें और अफसरों की मनमानी।कड़ा रुख बरकरार, 20 दिन का इंतजार।
मंत्री स्वतंत्र देव सिंहयोजनाओं की समीक्षा और प्रोटोकॉल।आश्वासन देकर रवाना हुए, मीडिया से बनाई दूरी।
विपक्ष (अखिलेश यादव)बीजेपी के अंदरूनी कलह और प्रशासनिक विफलता।सत्ता विरोधी लहर का दावा।

महोबा की यह घटना केवल सड़कों के गड्ढों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यूपी बीजेपी में विधायकों और मंत्रियों के बीच बढ़ती खाई और नौकरशाही पर पकड़ की कमजोरी को भी दर्शाती है। अब देखना यह होगा कि क्या 20 दिन में महोबा की सड़कें सुधरती हैं या यह चिंगारी किसी बड़ी राजनीतिक आग का रूप लेगी।

By News Scoop Desk

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