न्यूज स्कूप : डिजिटल क्रांति के इस दौर में UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) हमारी जिंदगी का अटूट हिस्सा बन गया है। चाय की दुकान से लेकर बड़े शोरूम तक, हर जगह हम सेकंडों में भुगतान कर देते हैं। लेकिन, तकनीक जितनी सुविधाजनक है, उतनी ही पेचीदा भी। कई बार ऐसा होता है कि हम पेमेंट करते हैं, स्क्रीन पर ‘ट्रांजैक्शन फेल’ (Transaction Failed) आता है, लेकिन मोबाइल पर मैसेज आता है कि पैसे कट गए हैं। ऐसी स्थिति में अक्सर लोग घबरा जाते हैं।
क्या आपका पैसा सुरक्षित है? बैंक इसमें आपकी क्या मदद करेगा? और अगर पैसा वापस न आए तो आपको क्या करना चाहिए? आइए विस्तार से जानते हैं यूपीआई फेलियर और उसके समाधान से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी।
हर बार यूपीआई का सर्वर डाउन होना ही फेलियर की वजह नहीं होती। इसके पीछे कई अन्य कारण हो सकते हैं:
- ट्रांजैक्शन लिमिट: बैंकों और यूपीआई ऐप्स (जैसे Google Pay, PhonePe) की अपनी दैनिक सीमा होती है। अगर आप उस सीमा को पार कर चुके हैं, तो पेमेंट फेल हो जाएगा।
- मर्चेंट टैगिंग: इंश्योरेंस या निवेश जैसे बड़े भुगतानों के लिए अलग कैटेगरी होती है। यदि आपका बैंक उस विशेष मर्चेंट कैटेगरी को सपोर्ट नहीं करता, तो बड़ा अमाउंट अटक सकता है।
- टेक्निकल ग्लिच: बैंक के सर्वर में देरी या कमजोर इंटरनेट कनेक्शन भी पेंडिंग ट्रांजैक्शन की बड़ी वजह है।
अगर पेमेंट फेल हुआ और पैसे कट गए, तो RBI का ‘ऑटो-रिवर्सल’ (Auto-reversal) नियम आपके काम आता है।
- रिफंड का समय: ज्यादातर मामलों में पैसा ‘T+1’ यानी ट्रांजैक्शन के अगले दिन तक वापस आ जाना चाहिए।
- मुआवजे का प्रावधान: यदि बैंक तय समय (आमतौर पर 5 दिन) के भीतर पैसा वापस नहीं करता, तो ग्राहक को ₹100 प्रति दिन के हिसाब से मुआवजा पाने का अधिकार है।
- बैंक की मदद: बैंक आपके ट्रांजैक्शन का स्टेटस चेक कर सकता है, ‘डिस्प्यूट’ (Dispute) दर्ज कर सकता है और दूसरे बैंक के साथ तालमेल बिठाकर रिवर्सल प्रक्रिया तेज कर सकता है।
- बैंक क्या नहीं करेगा: यदि आपने गलती से किसी गलत व्यक्ति को पैसे भेज दिए और ट्रांजैक्शन ‘सफल’ (Successful) रहा, तो बैंक उसे वापस नहीं ला सकता। सफल ट्रांजैक्शन को फेल नहीं माना जाता; ऐसे में आपको उस व्यक्ति से खुद बात करनी होगी या पुलिस में शिकायत करनी होगी।
अगर पैसा 24-48 घंटों में वापस न आए, तो ये कदम उठाएं:
- ऐप में शिकायत: सबसे पहले यूपीआई ऐप के ‘Help’ या ‘Report a Problem’ सेक्शन में जाकर शिकायत करें।
- रेफरेंस नंबर: अपने पास ‘UPI Reference Number’ और ट्रांजैक्शन का स्क्रीनशॉट जरूर रखें।
- बैंक कस्टमर केयर: ऐप से समाधान न मिलने पर अपने बैंक के कस्टमर केयर पर कॉल करें और टिकट नंबर (Complaint Number) लें।
- बैंकिंग ओम्बड्समैन: यदि 30 दिनों तक समाधान न मिले, तो RBI के ओम्बड्समैन (Ombudsman) पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
जब कोई ट्रांजैक्शन ‘पेंडिंग’ या ‘अटका’ हुआ दिखे, तो उसी समय दोबारा पेमेंट करने की गलती न करें। इससे ‘डुप्लीकेट डेबिट’ हो सकता है और आपका पैसा दो बार कट सकता है। हमेशा पहले ट्रांजैक्शन के फेल होने का आधिकारिक स्टेटस अपडेट होने का इंतजार करें, तभी नया प्रयास करें।
