न्यूज स्कूप : उत्तराखंड के चमोली जिले में आज रविवार (30 नवंबर) की सुबह आए भूकंप के झटकों ने एक बार फिर स्थानीय लोगों में दहशत पैदा कर दी। सुबह ठीक 10 बजकर 27 मिनट पर कर्णप्रयाग, नारायणबगड़, थराली और देवाल सहित आसपास के क्षेत्रों में ये हल्के झटके महसूस किए गए। अचानक धरती हिलने पर लोग घबराकर अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए।
रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 3.7 दर्ज की गई है।
आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने बताया कि भूकंप का केंद्र चमोली के आसपास स्थित रहा। राहत की बात यह है कि अभी तक कहीं से भी किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है, लेकिन टीम हालात पर बारीकी से नजर बनाए हुए है। उन्होंने लोगों से किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर विश्वास करने की अपील की।
यह घटना इसलिए भी अधिक चिंता का विषय है क्योंकि उत्तराखंड भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से पहले से ही बेहद संवेदनशील माना जाता रहा है। इस संबंध में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव आया है। हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने डिज़ाइन भूकंपीय जोखिम संरचनाओं के मानदंड (रीति संहिता-2025) के तहत नया भूकंप मानचित्र जारी किया है।
- नया वर्गीकरण: इस नए वर्गीकरण में उत्तराखंड को जोन-6, यानी अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।
- बड़ा बदलाव: इससे पहले राज्य के जिलों को जोन-4 और जोन-5 में विभाजित किया गया था, लेकिन अब पूरा राज्य उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में शामिल हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जोन-6 में रखे गए प्रदेशों में भवन निर्माण के दौरान अत्याधुनिक भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। इसका सीधा मतलब है कि पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्य अब पहले से कहीं अधिक सावधानी और कड़े नियमों के साथ करने होंगे, खासकर उन जगहों पर जहाँ भूकंप की गतिविधि लगातार दर्ज की जाती है।
पुराने वर्गीकरण में उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ को सबसे संवेदनशील जोन-5 में रखा गया था, जबकि उत्तरकाशी, टिहरी, देहरादून, हरिद्वार और पौड़ी गढ़वाल जोन-4 में आते थे।
इसके अलावा, वर्ष 2021 में लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, देश के 38 सबसे संवेदनशील शहरों में उत्तराखंड के प्रमुख शहर अल्मोड़ा, नैनीताल, देहरादून और रुड़की भी शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि चमोली और आसपास के क्षेत्रों में बार-बार आने वाली हल्की भूकंपीय हलचलें भविष्य में किसी बड़े खतरे की चेतावनी हो सकती हैं। ऐसे में, सरकार और स्थानीय निवासियों दोनों के लिए निरंतर सतर्कता और नए जोन-6 के मानकों के अनुरूप सुरक्षित निर्माण बेहद जरूरी है।
