20 Feb 2026, Fri
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न्यूज स्कूप : हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है, लेकिन वैकुंठ एकादशी (Vaikuntha Ekadashi) को सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसे ‘मोक्षदा’ और ‘पुत्रदा एकादशी’ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस पावन दिन पर स्वयं भगवान विष्णु के धाम ‘वैकुंठ’ के द्वार खुले होते हैं, और जो भक्त इस दिन विधि-विधान से व्रत व पूजन करता है, उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। साल 2025 का अंत इसी पावन तिथि के साथ होने जा रहा है।

आइए जानते हैं वैकुंठ एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और वह विशेष सावधानियां जिनका पालन करना अनिवार्य है।

वैकुंठ एकादशी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त

तारीख को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति रहती है, लेकिन उदयातिथि और पंचांग के अनुसार गणना इस प्रकार है:

  • एकादशी तिथि आरंभ: 30 दिसंबर 2025, सुबह 07:50 बजे से।
  • एकादशी तिथि समाप्त: 31 दिसंबर 2025, सुबह 05:00 बजे तक।
  • व्रत की तारीख: उदयातिथि के नियम के अनुसार, 30 दिसंबर 2025, मंगलवार को वैकुंठ एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
  • पारण का समय: व्रत खोलने (पारण) का शुभ समय 31 दिसंबर 2025 को दोपहर 01:26 बजे से 03:31 बजे के बीच रहेगा।

पूजन विधि: ऐसे पाएं श्रीहरि का आशीर्वाद

वैकुंठ एकादशी पर भगवान नारायण की पूजा का विशेष विधान है:

  1. ब्रह्ममुहूर्त स्नान: सुबह जल्दी उठकर पवित्र जल से स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें।
  2. संकल्प: भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  3. पूजन सामग्री: भगवान को चंदन, रोली, पीले फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।
  4. घी का दीपक: शुद्ध गाय के घी का अखंड दीपक जलाना घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि लाता है।
  5. विष्णु सहस्रनाम: इस दिन विष्णु सहस्रनाम या लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।

तुलसी पूजन और जरूरी सावधानी

तुलसी के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है। वैकुंठ एकादशी पर तुलसी दल का भोग जरूर लगाएं, लेकिन एक बात का विशेष ध्यान रखें:

सावधानी: एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, जल चढ़ाने से उनका व्रत भंग हो सकता है।

‘वैकुंठ द्वार’ का महत्व

दक्षिण भारत के मंदिरों और कई प्रमुख विष्णु मंदिरों में इस दिन एक विशेष द्वार खोला जाता है, जिसे ‘वैकुंठ द्वार’ कहा जाता है। भक्त इस द्वार से गुजरकर भगवान के दर्शन करते हैं। माना जाता है कि इस द्वार से गुजरने मात्र से जीवन के सभी पाप धुल जाते हैं और स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

दान-पुण्य की महिमा

इस दिन दान का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।

  • किसे दान दें: गरीबों, ब्राह्मणों और कन्याओं को भोजन कराएं।
  • क्या दान दें: पीले वस्त्र, हल्दी, केसर, चने की दाल, फल और भगवद्गीता का दान करने से कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं।

By News Scoop Desk

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