न्यूज स्कूप : शिव की नगरी वाराणसी (Varanasi) इन दिनों राजनीतिक और सांस्कृतिक चर्चाओं के केंद्र में है। महाश्मशान मणिकर्णिका घाट के पुनरुद्धार और विकास को लेकर राज्य सरकार और विपक्षी दलों के बीच बहस छिड़ी हुई है। जहां एक ओर इसे आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की कवायद चल रही है, वहीं दूसरी ओर इसकी प्राचीन विरासत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
विवादों के इस शोर के बीच, वाराणसी की वह ‘फिल्मी’ छवि एक बार फिर चर्चा में है, जिसने दशकों से बॉलीवुड और ग्लोबल फिल्ममेकर्स को अपनी ओर आकर्षित किया है। बनारस की संकरी गलियां, गंगा की अविरल धारा और घाटों पर जीवन-मृत्यु का शाश्वत मेल—यही वह तत्व हैं जो किसी भी साधारण कहानी में जान फूंक देते हैं। आइए नजर डालते हैं उन प्रमुख फिल्मों पर, जिन्होंने काशी को एक अलग ही अंदाज में पेश किया।
नीरज घेवान की यह फिल्म काशी की सबसे सटीक तस्वीर पेश करती है। मणिकर्णिका घाट पर फिल्माए गए अंतिम संस्कार के दृश्य और डोम समुदाय के संघर्ष को विक्की कौशल ने जीवंत कर दिया। यह फिल्म दिखाती है कि कैसे बनारस में मौत भी जीवन का एक हिस्सा है।
आनंद एल राय ने धनुष और सोनम कपूर के जरिए बनारस के युवा मिजाज को दिखाया। अस्सी घाट की मस्ती, गलियों की भागदौड़ और गंगा किनारे की शामों ने इस फिल्म को कल्ट क्लासिक बना दिया।
रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की इस फिल्म में वाराणसी के घाटों को एक रहस्यमयी और आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र के रूप में दिखाया गया। चेत सिंह घाट और गंगा किनारे के दृश्यों ने फिल्म की भव्यता में चार चांद लगा दिए।
यह फिल्म पूरी तरह से काशी के ‘साल्वेशन होटल्स’ पर आधारित है, जहां लोग मोक्ष की कामना लेकर अपनी मृत्यु का इंतजार करते हैं। यह बनारस के उस आध्यात्मिक पहलू को छूती है जो दुनिया में कहीं और नहीं मिलता।
| फिल्म का नाम | प्रमुख शूटिंग लोकेशन | मुख्य विषय |
| मसान | मणिकर्णिका घाट | प्रेम, विछोह और मृत्यु |
| रांझणा | अस्सी घाट, रामनगर किला | एकतरफा प्यार और बनारसी मस्ती |
| भूल चूक माफ | राजेंद्र प्रसाद घाट, गोदौलिया | रॉम-कॉम और फैंटेसी |
| मोहल्ला अस्सी | अस्सी घाट, स्थानीय चाय की दुकानें | संस्कृति और सामाजिक मुद्दे |
| ब्रह्मास्त्र | अस्सी और दशाश्वमेध घाट | फैंटेसी और आध्यात्मिकता |
काशी की सादगी में एक ऐसी गहराई है जो कैमरे पर बहुत खूबसूरती से उभरती है। मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट जैसे स्थान फिल्मकारों को मानवीय संवेदनाओं के सबसे ऊंचे शिखर पर ले जाते हैं। हाल ही में रिलीज हुई ‘वनवास’ और ‘भूल चूक माफ’ जैसी फिल्मों ने भी बनारस के स्थानीय रंगों, जैसे गोदौलिया चौक की भीड़ और अस्सी की शांति को बखूबी इस्तेमाल किया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हाल ही में कहा कि काशी को अब वैश्विक पहचान मिल चुकी है। फिल्म उद्योग के लिए यहां की ‘सिंगल विंडो’ शूटिंग पॉलिसी और बदलती बुनियादी सुविधाओं ने इसे ‘फिल्म हब’ बना दिया है।
मणिकर्णिका घाट पर विकास को लेकर विवाद अपनी जगह है, लेकिन फिल्मकारों के लिए काशी हमेशा से वही ‘अविनाशी’ नगरी रहेगी जो हर बार एक नई कहानी कहती है। सिनेमा ने बनारस को सिर्फ एक लोकेशन नहीं, बल्कि एक अमर किरदार के रूप में स्थापित किया है।
