न्यूज स्कूप : वास्तु शास्त्र को हमारे प्राचीन ऋषियों ने एक विज्ञान के रूप में विकसित किया था, जिसका सीधा संबंध दिशाओं और पंचतत्वों के संतुलन से है। जब घर में वास्तु दोष (Vastu Dosh) उत्पन्न होता है, तो वह केवल ईंट-पत्थर की दीवारों को प्रभावित नहीं करता, बल्कि वहाँ रहने वाले लोगों के मानसिक, शारीरिक और आर्थिक जीवन को भी तहस-नहस कर देता है।
तमाम कोशिशों के बावजूद काम न बनना, घर में बीमारियों का डेरा होना और कर्ज का बोझ बढ़ना—ये सभी संकेत हैं कि आपके घर की ऊर्जा संतुलित नहीं है। वास्तु शास्त्र में कुछ बेहद सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने जीवन से दुख और दुर्भाग्य को हमेशा के लिए विदा कर सकते हैं।
वास्तु के अनुसार, घर का मुख्य द्वार वह स्थान है जहाँ से लक्ष्मी और सौभाग्य का प्रवेश होता है।
- सफाई का महत्व: मुख्य द्वार को हमेशा साफ-सुथरा रखें। दरवाजे के सामने कभी भी कूड़ा-दान, जूते-चप्पल का ढेर या टूटी-फूटी वस्तुएं न रखें।
- दैनिक क्रिया: रोज सुबह मुख्य द्वार के सामने झाड़ू लगाकर सफाई करें और संभव हो तो गंगाजल का छिड़काव करें। इससे नकारात्मक शक्तियां घर के भीतर प्रवेश नहीं कर पातीं।
नमक में नकारात्मक ऊर्जा को सोखने की अद्भुत क्षमता होती है। वास्तु दोष निवारण के लिए नमक का उपयोग दो तरह से किया जा सकता है:
- पोंछे का पानी: घर में पोंछा लगाते समय पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाएं। यह घर की सूक्ष्म नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर देता है।
- कटोरी में नमक: रात के समय एक कांच की कटोरी में सेंधा नमक भरकर घर के किसी कोने या टॉयलेट में रखें। यह वातावरण की अशुद्धियों को सोख लेता है। (हर हफ्ते इस नमक को बदल दें)।
पौधे न केवल ऑक्सीजन देते हैं, बल्कि घर के वास्तु को भी ठीक करते हैं।
- तुलसी: घर के आंगन या उत्तर-पूर्व दिशा में तुलसी का पौधा जरूर लगाएं। यह सुख-समृद्धि का प्रतीक है।
- मनी प्लांट और बांस (Bamboo): इन पौधों को घर की उत्तर दिशा में लगाने से धन के नए मार्ग खुलते हैं। ये पौधे सकारात्मकता का संचार करते हैं।
ध्वनि विज्ञान का वास्तु में बड़ा महत्व है।
- वातावरण की शुद्धि: सुबह-शाम पूजा के दौरान शंख और घंटी बजाने से जो कंपन (Vibrations) पैदा होते हैं, वे घर के कोनों में छिपी नकारात्मक ऊर्जा को जड़ से खत्म कर देते हैं।
- नकारात्मकता का नाश: शंख की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और मानसिक शांति मिलती है।
घर का मंदिर ऊर्जा का केंद्र बिंदु होता है।
- नियमित दीपक: मंदिर में रोजाना सुबह-शाम दीपक जलाएं। अंधकार दरिद्रता का प्रतीक है, जबकि दीपक का प्रकाश ज्ञान और समृद्धि का।
- खंडित मूर्तियां: मंदिर में कभी भी टूटे हुए दीपक, खंडित मूर्तियां या मुरझाए हुए फूल न रखें। मंदिर की नियमित सफाई से घर में वास्तु दोष का प्रभाव स्वतः ही कम होने लगता है।
| समस्या | संभावित कारण | वास्तु समाधान |
| लगातार बीमारी | दक्षिण-पश्चिम दिशा में दोष | नमक के पानी से पोंछा और मंदिर में दीप। |
| आर्थिक तंगी | मुख्य द्वार पर कबाड़ | उत्तर दिशा में मनी प्लांट लगाएं। |
| मानसिक तनाव | घर में भारीपन और गंदगी | शंख बजाएं और मुख्य द्वार साफ रखें। |
वास्तु शास्त्र कोई जादू-टोना नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने की एक कला है। इन छोटे-छोटे बदलावों को अपनाकर आप अपने घर को खुशियों के केंद्र में बदल सकते हैं। याद रखें, जहाँ स्वच्छता और अनुशासन होता है, वहाँ ईश्वर और सौभाग्य का वास सदैव रहता है।
