न्यूज स्कूप : आज के दौर में सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का एक अभिन्न अंग बन चुका है। हर छोटी-बड़ी खुशी, याद और जीवन का हर पल अब इंस्टाग्राम (Instagram) पर कैद होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर किसी दिन किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए, तो उसके इंस्टाग्राम अकाउंट का क्या होगा? क्या वह प्रोफाइल हमेशा के लिए ऐसी ही बनी रहेगी या अपने आप डिलीट हो जाएगी?
हकीकत इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है। इंस्टाग्राम की एक खास पॉलिसी है जिसके तहत मृत व्यक्ति का अकाउंट एक तरह के ‘डिजिटल स्मारक’ में बदल जाता है। आइए जानते हैं वो 5 बातें जो शायद आपने कभी नहीं सोची होंगी कि आपके इंस्टाग्राम अकाउंट के साथ क्या होता है:
1. अकाउंट डिलीट नहीं होता, बल्कि ‘मेमोरियल’ बन जाता है
अगर किसी यूजर का निधन हो जाता है, तो इंस्टाग्राम उसका अकाउंट तुरंत डिलीट नहीं करता। परिवार या दोस्त कंपनी को आधिकारिक तौर पर सूचित करके अकाउंट को Memorialized Account (मेमोरियल अकाउंट) बना सकते हैं।
मेमोरियल अकाउंट बनने का मतलब है कि प्रोफाइल मौजूद रहेगी, लेकिन अब कोई भी उसमें लॉग इन नहीं कर पाएगा। उस व्यक्ति को याद करने के लिए प्रोफाइल तस्वीर और पोस्ट जस की तस बनी रहती हैं।
2. प्रमाण देना ज़रूरी है
किसी यूजर के निधन के बाद उसका अकाउंट मेमोरियलाइज़ करने के लिए, इंस्टाग्राम परिवार या करीबी से कुछ आधिकारिक प्रमाण मांगता है। यह प्रमाण मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) या अखबार में छपी खबर (Obituary) जैसी विश्वसनीय जानकारी हो सकती है। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी व्यक्ति दुर्भावनापूर्ण तरीके से झूठी रिपोर्टिंग न करे।
3. पूरी तरह डिलीट करने का भी विकल्प है
अगर परिवार चाहता है कि मृत व्यक्ति का अकाउंट पूरी तरह से सोशल मीडिया से हटा दिया जाए, तो इंस्टाग्राम इसके लिए भी विकल्प देता है। परिवार ‘Request to Remove Account’ फॉर्म के जरिए यह प्रक्रिया पूरी कर सकता है। इस प्रक्रिया में अकाउंट से जुड़ी पहचान, परिवार से रिश्ता और कानूनी दस्तावेज जमा करने होते हैं।
4. कोई लॉग इन नहीं कर सकता
एक बार मेमोरियल अकाउंट बनने के बाद, किसी को भी उसमें लॉग इन करने या उसका पासवर्ड बदलने की अनुमति नहीं होती है। यह एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कदम है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी व्यक्ति मृत व्यक्ति के नाम से कोई नई पोस्ट या आपत्तिजनक मैसेज न भेज सके।
5. यादों का डिजिटल टाइम कैप्सूल
मेमोरियल अकाउंट एक तरह से डिजिटल स्मारक बन जाता है। परिवार, दोस्त और प्रशंसक इस अकाउंट को देखकर उस व्यक्ति की पुरानी यादों, पोस्ट और तस्वीरों से जुड़ सकते हैं। सोशल मीडिया अब केवल कनेक्ट करने का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसा डिजिटल टाइम कैप्सूल बन चुका है, जहाँ इंसान भले ही इस दुनिया से चला जाए, लेकिन उसकी यादें और डिजिटल फुटप्रिंट हमेशा जिंदा रहते हैं।

