न्यूज स्कूप : आज के समय में स्मार्टफोन कंपनियां अपने डिवाइसेस को लुभावने और अतरंगी रंगों में पेश करती हैं। कोई फोन ‘सनसेट रेड’ है तो कोई ‘ओशन ब्लू’। लेकिन एक चीज जो सालों से नहीं बदली, वह है आपके फोन का चार्जर। आपने गौर किया होगा कि चाहे आपका फोन किसी भी प्रीमियम कलर का क्यों न हो, उसके साथ मिलने वाला एडॉप्टर और केबल हमेशा ब्लैक या व्हाइट ही होता है।
आखिर कंपनियां बाकी एक्सेसरीज की तरह चार्जर को कलरफुल क्यों नहीं बनातीं? क्या यह सिर्फ डिजाइन की पसंद है या इसके पीछे कोई गहरा तकनीकी कारण है? आइए समझते हैं उन 3 प्रमुख वजहों को, जिनके कारण चार्जर की दुनिया सिर्फ दो रंगों तक सिमटी हुई है।
चार्जर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो सीधे हाई-वोल्टेज बिजली के संपर्क में रहता है। इसे बाजार में उतारने से पहले कंपनियों को कड़े फायर सेफ्टी और शॉर्ट-सर्किट टेस्ट से गुजरना पड़ता है।
- सर्टिफाइड प्लास्टिक: ब्लैक और व्हाइट रंग के प्लास्टिक फॉर्मूले (Polycarbonate) वैश्विक स्तर पर पहले से ही ‘सेफ्टी सर्टिफाइड’ होते हैं।
- जल्द अप्रूवल: अगर कंपनियां नए रंग के चार्जर बनाती हैं, तो उन्हें हर रंग के लिए अलग से सेफ्टी टेस्टिंग करानी होगी, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होते हैं। न्यूट्रल कलर्स के साथ रिस्क कम होता है।
चार्जर के काले या सफेद होने के पीछे एक बड़ा वैज्ञानिक कारण हीट डिसिपेशन (Heat Dissipation) है।
- तापमान नियंत्रण: चार्जिंग के दौरान एडॉप्टर के अंदर मौजूद कंपोनेंट्स काफी गर्मी पैदा करते हैं। ब्लैक कलर गर्मी को अवशोषित (Absorb) करने में सक्षम होता है, जबकि व्हाइट कलर उसे रिफ्लेक्ट करता है।
- ओवरहीटिंग से बचाव: इन रंगों की थर्मल प्रॉपर्टीज ऐसी होती हैं कि वे हीट को ट्रैप नहीं होने देते और चार्जर के अंदरूनी हिस्सों को ठंडा रखने में मदद करते हैं। अगर चार्जर बहुत ज्यादा डार्क या नियॉन रंगों का होगा, तो हीट मैनेजमेंट में दिक्कत आ सकती है, जिससे चार्जर पिघलने या ब्लास्ट होने का खतरा बढ़ जाता है।
कंपनियों के लिए ‘मास प्रोडक्शन’ (बड़े पैमाने पर उत्पादन) में ब्लैक और व्हाइट चार्जर बनाना काफी सस्ता पड़ता है।
- लागत में कमी: यदि कंपनी हर फोन के कलर के हिसाब से चार्जर बनाएगी, तो उसे अलग-अलग कलर की डाइ (Dye) और प्लास्टिक की जरूरत होगी। इससे चार्जर की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ जाएगी, जिसका बोझ अंततः ग्राहक की जेब पर ही पड़ेगा।
- यूनिवर्सल उपलब्धता: अगर आपका चार्जर खराब हो जाता है, तो किसी भी दुकान पर ब्लैक या व्हाइट चार्जर मिलना आसान है। सोचिए, अगर आपका फोन ‘मिंट ग्रीन’ है और आपको उसी कलर का चार्जर न मिले, तो यह यूजर्स के लिए भी सिरदर्द बन जाएगा।
ब्लैक और व्हाइट रंग न केवल दिखने में प्रोफेशनल और क्लासी लगते हैं, बल्कि वे तकनीकी रूप से सबसे सुरक्षित और किफायती भी हैं। यही वजह है कि टेक जगत की दिग्गज कंपनियां प्रयोगों के बावजूद चार्जर के रंगों के मामले में कोई रिस्क नहीं लेना चाहतीं। अगली बार जब आप अपना चार्जर देखें, तो समझ जाइएगा कि यह सिर्फ एक एक्सेसरी नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग का एक सुरक्षित नमूना है।
